Followers

Friday, July 9, 2010

देश ढूँढता है

इस अंधियारी राह में

मै अपना नाम ढूँढता हूँ

आज के इस जहाँ में

राम रहीम नानक यीशू के

पैगाम ढूँढता हूँ

इंसान से बने हैवान की आँखों में

मै आज मासूमियत के ख्वाब ढूँढता हूँ

मौत के किनारे वक्त की रेत पर

बना कर घरौंदा मै

जिन्दगी की लहर ढूँढता हूँ

चिलचिलाती धूप में भी

बारिश की फुहार ढूँढता हूँ

आतंक के साये में रह कर

मै अमन की राह ढूँढता हूँ

वक्त के धुधले पडे आइने में 

मै अपनी पहचान ढूँढता हूँ